रचयिता-उर्मिला सिदार
जिला-रायगढ़
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-गद्य
शीर्षक-*सर्वत्र व्याप्त*
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व्यापक सत्ता शून्य स्वरुप में सर्वत्र व्याप्त है ।अनुभव होने से वह पास है, अनुभव न कर पाने से दूर है।वह क्रियाशून्य है।शून्य मे समाहित सभी प्रकृति क्रिया शील है।प्रकृति का संचालन का आधार वही ऊर्जा स्वरूप में शून्य है,जो निराकार स्वरूप में सर्वत्र विद्यमान है। सभी इकाईयां प्रकृति स्वरूप में उसी में समाया है और हर अशों में वह ऊर्जा स्वरूप में समाया है।इसे अनुभव से ही अनुभूति किया जाता है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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