लेखिका -उर्मिला सिदार
जिला -रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा -गद्य
शीर्षक- संपूर्ण ज्ञाता
संम्पर्क-9303298994
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हर मनुष्य चार आयाम में जीता है। अनुभव, विचार, व्यवहार, कार्य इन आयामों में जो मनुष्य विद्या का निर्वहन करता है ,वही व्यक्ति ज्ञान संपन्न व्यक्ति कहलाता है या संपूर्ण ज्ञाता कहलाता है ,जैसा वह ज्ञान का अनुभव करता है ।उसी प्रकार उसके मन में विचार आता है और उस विचार को व्यवहार और कार्य में प्रमाणित करता है जहां समस्या है। वहां समाधान और जहां समाधान है। वहां आगे परंपरा बनाने की कोशिश करता है ।यही ज्ञानी मनुष्य का कर्तव्य है, अतः वह जहां समस्या होती है या क्लेश होता है ,वहां ज्ञान का निर्वाह कर अमरत्व पद को पाता है और जहां अज्ञान या अविद्या प्रवृत्ति में जीता है ,तो समस्या और दुःख पाता है अर्थात ज्ञान का सदुपयोग नहीं कर पाता। अतः विद्या से जीने वाला अमृत अर्थात सुख और अविद्या से जीने वाला विष (मृत्यु) अर्थात दुःख पाता है। ज्ञान सभी मानव के लिए सर्वोपरि है ,अतः ज्ञान के प्रकाश में जीना ही,मानव का सुख पूर्वक जीना है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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