रचयिता -उर्मिला सिदार
जिला -रायगढ़
राज्य- छत्तीसगढ़
विधा -कविता
शीर्षक-आत्मदर्शन
संपर्क- 930 32 98 994
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*आत्मदर्शन
अपने पराए की दीवार तोड़ कर ,
जो सबको अपना समझते हैं ।
प्रेम भाव का अनुभव कर,
वह आत्म दर्शन करते हैं।
प्रेम में पराए नहीं होते,
प्रेम में एकत्व भाव होता है।
जो एकत्व का अनुभव करें,
वही मनु मानत्व में जीता है।
भूत- भविष्य से परे होकर ,
जो वर्तमान में सुख से जीता है।
भ्रम से मुक्ति पाकर वह जन,
परमात्मा का दर्शन करता है।
सभी जीवन का एक ही लक्ष्य ,
वह जागृत होना चाहता है।
जागृत होकर इस भवसागर में,
न्याय धर्म में जीना चाहता है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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