कवि :- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
राज्य :- छत्तीसगढ़
विधा :- कुंडलियां छंद
शीर्षक :- परमात्मा दर्शन
जो नर सबको सोचता, परमात्मा के संग।
भेद नहीं करता कभी, देख बदन का रंग।।
देख बदन का रंग, घृणा का भाव जगे जो।
परम सत्य का दर्श, मिले फिर कैसे उसको।।
कह जोगी कर जोड़, मिले ना सबको अवसर।
मिले उसे ही योग, एक लाखों में जो नर।।
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