कवयित्री- गोमती सिंह
जिला- कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-कुण्डलियाँ छंद
शीर्षक-माया जाल
-ॠषि मनीषी कह गये , दुनियाँ मायाजाल है।
चार दिन का सुख यहाँ,
शेष सब जंजाल है।
शेष सब जंजाल है तो निष्काम कर्म हम कर जाएँ।
निष्काम कर्म करते हुए,
मोक्ष मार्ग को अपनाएं।
क्यों छीनें औरों के सुख को ,
औरों के सुख के खातिर अपना जीवन अर्पण कर जाएँ।
फिर पाकर ईश्वर का सामीप्य,
मोक्ष के अधिकारी हो जाएँ।
।।इति।।
-गोमती सिंह
छत्तीसगढ़
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