सुन्दगढ़, ओडिशा
विधा-कविता
विषय-व्यवहार
व्यक्ति के व्यक्तित्व की होते हैं पहचान
उसके सीखे संस्कार और व्यवहार
ज्ञान भी थोथे ही नज़र आते हैं
जब ना हो मानव में व्यवहार
बिन व्यवहार होते हैं फिजूल
रिश्ते-नाते,लोग परिवार
जीवन मे कुछ सीखो तो
सीखो तुम अच्छा व्यवहार
देते ये सम्मान जगत में
गुंजित होते हैं उनके नाम
आत्मा सम अमर होते हैं
मरण के बाद भी व्यवहार
प्रतिबिंब होते हैं जैसे आईने में
मनुष्य की प्रतिछाया होते हैं व्यवहार।।
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