Tuesday, June 8, 2021

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" की रचना- व्यवहार

रचनाकार -- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
स्थान - पिपरभावना, बलौदाबाजार छत्तीसगढ़ 
विषय -  व्यवहार 
विधा -  दोहा
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         व्यवहार पर दोहे
       ★★★★★★★
       
ज्ञानी करता ज्ञान से,जग में करम महान।
मत भूलना संस्कार को,ज्ञानी का अवदान।।

सरल सहज व्यवहार है,जीवन का आधार।
श्रेष्ठ वही मानव यहाँ,जिसमें शुभ संस्कार।।

प्रीत रीत की बात हो , सुरभित हो संसार।
संभव यह तब ही सखा,जब धारो संस्कार।। 

शांत सरोवर में सदा , खिलते सुख के फूल।
क्रोध जलन से कब बना,जीवन यह अनुकूल।।

मानवता के भाव का,समझ गया जो मर्म।
उनके पावन कर्म  से , रहता  दूर  अधर्म।।

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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)

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