स्थान- दुर्ग ( छ.ग.)
विधा- कविता छंदमुक्त
शीर्षक- व्यवहार मित्र से
कुछ दोस्त...
बड़े प्यारे होते हैं
दिल के करीब लगते है
प्यारी- प्यारी बातें उनकी
ज्यों मिश्री हो घुली
सुबह शाम की मौज मस्ती
शरारतें उनकी मन को भाती
लाख गिले-शिकवे में भी
दोस्ती सदा बनी रहती..
सुख-दुख में जो साथ रहे
मित्रता सबसे ऊँची वही
महज मन बहलाने वास्ते
बनते नहीं मित्र प्यारे...
बात यह तुम गांठ बाँध लो
पल-पल मित्र ना बदलो
हर मुश्किल में साथ रहो
व्यवहार सबसे मधुर रखो ।
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