रचियता - श्रीमती श्वेता सिंह क्षत्रीय
जिला - जांजगीर चाम्पा
विषय - श्रृंगार
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मेरी याद में यूँ अश्क न बहाया करो,
पल-पल मुझे यूँ तड़पाया न करो।
जिन्दगी एक दूसरे से मिलने की आस में कट रही,
बस तुमसे एक गुजारिश है, हर सांस में अपनी खुशबू बिखराया न करो।
ये सिन्दूरी शाम लग रही तेरी सतरंगी चुनर है,
मुझसे दूर होकर भी पास है, ये तेरी एक हुनर है।
हर वक़्त मेरे पास हो, बस यही एहसास खुद को दिलाया करो,
मेरी याद में यूँ अश्क न बहाया करो।।
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श्वेता सिंह क्षत्रीय, जांजगीर
Nice
ReplyDeleteBahut accha
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