Saturday, June 12, 2021

लाजवाब हो तुम : चेतन सिंह

रचनाकार का नाम -- चेतन सिंह
शीर्षक --- लाजवाब हो तुम
              ( श्रृंगार रस )
पता --- कसडोल , छत्तीसगढ़
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चांद   सितारों  से  बनी ,
परियों से  लाजवाब  हो  तुम !
मेरे  जीने  की  मकसद  हो ,
मेरी आंखों का ख़्वाब हो तुम !

तुम हो इतनी हसीन ,
लगे हूर भी तुमसे शरमाने !
हम तो एक ही नज़र में ,
हो   गये   तुम्हारे  दीवाने !
बागों में जो अब तक ,
न खिली वो गुलाब हो तुम ! मेरे जीने की ......

और भी है हंसी जहां में  ,
पर  मेरे  मन  को कोई न भाया !
तुम्हीं हो मन के मीत मेरे ,
हमें बस तुम पर ही प्यार आया !
हमने पाई जो जिन्दगी में ,
सबसे बड़ी वो खिताब हो तुम ! मेरे जीने की ....

सोचता था कभी तन्हाई में ,
अपना भी किसी पर आए दिल !
जबसे  मिली  नजर तुमसे ,
चैन खोया , जीना  हुआ मुश्किल !
मेरे जेहन में थे जो कई सवाल ,
हर उन सवालों के जवाब हो तुम ! मेरे जीने की...

खुदा ने पहले सोची न बनाई ,
इस जहां की वो नायाब हो तुम !
अब तक मैंने जो पढ़ी नहीं ,
मेरे दिल की वो किताब हो तुम ! मेरे जीने की....

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