रचनाकार का नाम -- चेतन सिंह
शीर्षक --- लाजवाब हो तुम
( श्रृंगार रस )
पता --- कसडोल , छत्तीसगढ़
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चांद सितारों से बनी ,
परियों से लाजवाब हो तुम !
मेरे जीने की मकसद हो ,
मेरी आंखों का ख़्वाब हो तुम !
तुम हो इतनी हसीन ,
लगे हूर भी तुमसे शरमाने !
हम तो एक ही नज़र में ,
हो गये तुम्हारे दीवाने !
बागों में जो अब तक ,
न खिली वो गुलाब हो तुम ! मेरे जीने की ......
और भी है हंसी जहां में ,
पर मेरे मन को कोई न भाया !
तुम्हीं हो मन के मीत मेरे ,
हमें बस तुम पर ही प्यार आया !
हमने पाई जो जिन्दगी में ,
सबसे बड़ी वो खिताब हो तुम ! मेरे जीने की ....
सोचता था कभी तन्हाई में ,
अपना भी किसी पर आए दिल !
जबसे मिली नजर तुमसे ,
चैन खोया , जीना हुआ मुश्किल !
मेरे जेहन में थे जो कई सवाल ,
हर उन सवालों के जवाब हो तुम ! मेरे जीने की...
खुदा ने पहले सोची न बनाई ,
इस जहां की वो नायाब हो तुम !
अब तक मैंने जो पढ़ी नहीं ,
मेरे दिल की वो किताब हो तुम ! मेरे जीने की....
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