रचनाकार - आशा अतुल गुप्ता
स्थान- नौंगाँव (छतरपुर)म.प्र.
विषय -अकिंचन
विधा-कविता
शीर्षक-अकिंचन भक्त
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मुझसा नही कोई अकिंचन ,
तुझ सा नही कोई दाता ईश्वर ।
बिन माँगे झोली भर देते,
कैसे तेरा मैं कर्ज चुकाऊँ।
जीवन है दुखों का सागर,
नैय्या पार लगा दो तुम।
पाप की गठरी बहुत है भारी ,
कैसे बीझ उठाऊँ मैं।
तुम दीनन के रखवाले,
मै अकिंचन भक्त तुम्हारी।
दरश की प्यासी अँखियाँ मेरी,
अब तो दरश दिखला दो ना।
तेरी भक्ति करूँ दिन रात,
और नही है कोई काम।
रूपया पैसा नही है पास ,
भक्ति भाव से तुझे मनाऊँ।
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