Tuesday, June 1, 2021

गरिमा पोयाम कृत आलेख- विचार

लेखिका:- कु.गरिमा पोयाम
जिला:-कांकेर (छ. ग.)
विधा:- आलेख
विषय:- विचार

             हमारे मन मतिष्क में जो चिंतन मनन चलता रहता है उसे हम सरल शब्दों में विचार कह सकते हैं।विचार सुनने और बोलने में बहुत छोटा शब्द लगता है।लेकिन इन विचारों में असीम शक्ति होती है।वो कैसे चलिए समझते हैं।विचार दो प्रकार के होते हैं नकारात्मक और सकारात्मक।लगातार नकारात्मक सोचकर आप पूरे विश्व को अपना दुश्मन और सकारात्मक सोचकर आप पूरे विश्व को अपना मित्र बना सकते हैं।कहा भी गया है:- "सकारात्मक सोचोगे तो सकारात्मक होगा।" ये  विचार वायु की तरह बहते हैं।अगर हम किसी प्राणी के बारे में लगातार नकारात्मक सोचते हैं तो विचार नफरत में बदल जाती है और वही नफरत सामने वाले प्राणी के मन में भी आ जाती है।ये आपने भी अनुभव किया होगा और आप ही क्यों हर कोई अनुभव करता है पर ध्यान नहीं देता।इसे इस तरह से समझते हैं,आपको सड़क में चलते वक़्त कितने बार कुत्तों ने भौंका होगा,दौड़ाया भी होगा।क्योंकि आपके मन में ये विचार आता है कि ऐसे कुत्ते जो पालतू नहीं होते वो आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं।जब आप किसी कुत्ते को पालते हैं तो धीरे धीरे आपके मन में उसके प्रति लगाव उत्पन्न हो जाता है।वो आपको कभी नुकसान नहीं पहुंचाता।ऐसा इसलिए क्योंकि आपने लगातार अपने पालतू के कुत्ते के बारे में अच्छा सोचा है और आपकी यही सोच उस तक पहुंच कर उसके मन में भी आपके प्रति लगाव उत्पन्न कर गई।ये विचार कर्म के सिद्धांत की तरह कार्य करते हैं हालाँकि ये कर्म नहीं हैं।या आप कह सकते हैं कि ये विचार न्यूटन के गति के तीसरे नियम की तरह कार्य करते हैं:- "हर क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" कहने का तात्पर्य है जैसे विचार आप दूसरों के प्रति रखेंगे।दूसरों के मन में भी वैसे विचार आपके लिए उत्पन्न होंगे।ये मेरे अपने विचार हैं जो मेरी सोच के दायरे तक सीमित हैं और आपको गलत भी लग सकते हैं।
-गरिमा पोयाम

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...