रचना कार- मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-हम कविता क्यों लिखते हैं?
विधा- आलेख
कविता अंतर्मन की अभिव्यक्ति है|मन में उठती भावनाएँ समुद्र के ज्वार -भाटे की तरह उछाल लिए होती हैं|जब मन व्यथित हो या कारुणिक दृश्य देख मन आहत होता है,तब भी कलम चलने लगती है|
जब मन प्रसन्न हो,किसी के किये गये कार्य को देख गर्व महसूस हो,तब भी कविता फूट पड़ती है|
पर मैं अपनी व्यथा कहूँ तो जब M.Sc. करने जगदलपुर गई,तब होस्टल में रहती थी|सीनियर्स दीदी लोगों को पता चला कि मैं कविता लिखती हूँ|रेकिंग में मुझसे अपने लिए कविताएँ लिखवातीं|फिर क्या था|जिसकी भी जन्मदिन हो,उसकी सहेली आ धमकती,मेरी सहेली के लिए कविता लिख दीजिए|दो साल यही करती रही|पर इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि मैं आशु कवयित्री बन गई|
मैं प्रकृति की मनोरम दृश्य यथा नदियाँ,झरने,झूमते ,लहराते वृक्ष,पेड़ों पर लदे फल,आसमान पर उड़ते बादल,ठंडी पुरवाई ,बासंती बयार देख कविता लिखने का मन करता है|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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