रचयिता- पुष्पा पटनायक "पुष्प "
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- ग़ज़ल
शीर्षक - "क़ज़ा-ए-इश्क़"
***********************
उनसे जब इश्के वाले हाना था ,
वो जमाना भी क्या जमाना था ।
वो न आए न उनको आना था ,
जाकर आना तो इक बहाना था l
हाय वो दौरे आशिकी ये दोस्त,
ख्वाब था या कोई फसाना था ।
बिजलियों को पनाह दी जिसने,
वो हमारा ही आशियाना था ।
दे दिया आसरा तेरे गम ने,
वर्ना अपना कहां ठिकाना था ।
उनकी पहली नजर ने लूट लिया,
मेरा दिल ही मेरा खज़ाना था ।
जहर आलूद आज क्यों है फ़िजा,
कल तो मौसम बड़ा सुहाना था ।
कोई रुसवा हुआ सरे महफ़िल,
आपको यूं न मुस्कुराना था ।
No comments:
Post a Comment