Saturday, June 12, 2021

ग़ज़ल : पुष्पा पटनायक "पुष्प"

रचयिता- पुष्पा पटनायक "पुष्प "
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- ग़ज़ल 
शीर्षक - "क़ज़ा-ए-इश्क़"
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उनसे जब इश्के वाले हाना था ,
वो जमाना भी क्या जमाना था ।

वो न आए न उनको आना था ,
जाकर आना तो इक बहाना था l

हाय वो दौरे आशिकी ये दोस्त,
ख्वाब था या कोई फसाना था ।

बिजलियों को पनाह दी जिसने,
वो  हमारा  ही आशियाना  था ।

दे  दिया आसरा तेरे  गम  ने,
वर्ना अपना कहां ठिकाना था ।

उनकी पहली नजर ने लूट लिया,
मेरा  दिल ही  मेरा खज़ाना  था ।

जहर आलूद आज क्यों है फ़िजा,
कल  तो  मौसम बड़ा  सुहाना था ।

कोई  रुसवा हुआ  सरे महफ़िल,
आपको  यूं  न  मुस्कुराना  था ।

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