सुंदरगढ़,ओड़िसा
विधा-कविता
विषय-दिवास्वप्न
अक्सर तन्हाई में दिख जाता है
मनवांछित दिवास्वप्न कोई
जिंदगी ख़ुशगवार लगती है
कुछ क्षणों के लिए ही सही
सपनें उम्मीदों के पंख लिए
उड़ा ले जाते हैं अनन्त में कहीं
जागती पलकों में ही दुनिया बसती है
एकांत में देखे दिवास्वप्न कई
दिवास्वप्न होते हैं भले क्षणभंगुर
सीखा जाते हैं खुश रहने के गुर
हकीकत के सच से होते हैं कोसों दूर
पर देते हैं मन को सुकून भरपुर
गुजर कल भी लगता है
जैसे हो दिवास्वप्न कोई
छूटे कई अपनों के हाथ
जो चलते थे कभी साथ -साथ।।
Bahut sunder
ReplyDeleteNice mam
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