द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक:"जीवन"
विधा-दोहा छंद
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सुख दुख दोनों संग सदा, जैसे हैं दिन रात।
खुशियाँ संग आती कभी,या दुख की सौगात।।
पर पीड़ा को समझकर, काम करें सब नेक।
रास्ते खुलते उन्नति के, विचार बनें जब एक।।
विवेकवान मानुष है, जीवों में सर्वोत्तम।
हँसना रोना बोलना, गुण मिला है उत्तम।।
जीवों पर दया करना, है मानव का काम।
मनुष्य यहाँ भगवान है,देता नव आयाम।।
सच का मान अटल सदा, झूठ सके न मिटाय।
ऊँचा होता भाल जब, लगे कलंक मिट जाय।।
मिला "जीवन" मानुष का, ईश्वर का वरदान।
कर लें अच्छा काम हम,इसे अनमोल जान।।
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