जिला - बलौदाबाजार ( छ.ग.)
विषय - जीवन
विधा - दोहा छंद
शीर्षक - जीवन के दोहे
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// जीवन के दोहे //
क्या तू बगलें झाँकता,देखो निज कर्तव्य ।
जीवन कठोर कर्म है, समझो जरा रहस्य ।।
क्या से क्या जन हो गया,हाय रे परिवर्तन !
जीवन के हर कोण का ,सर्वथा अवमूल्यन ।।
शील स्वभाव चरित्रता,सुंदर स्वस्थ विचार ।
शाश्वत जीवन मूल्य है ,सात्विक लोकाचार ।।
जीवन तो रसधार है ,आनन्द का निर्झर ।
दोनों हाथ उलीचिये ,थोड़ा नहीं जीभर ।।
आधा किलो अनाज से,भर जाता है पेट ।
इसी के संग्रह में क्या,दें जीवन का भेंट।।
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