Monday, May 24, 2021

गजेन्द्र हरिहारनो" दीप" के दोहे- जीवन

रचनाकार :- गजेन्द्र हरिहारनो" दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय :- जीवन 
विधा :- दोहा छंद
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जीवन अपना देखिए, ईश्वर की सौगात ।
सत्कर्मों के साथ ही , बीते दिन अरु रात ।

पानी का है बुलबुला, जीवन अपना यार ।
मिलजुलकर हम सब रहें , करें सभी से प्यार ।

जीवन ये अनमोल है,सुन लो मेरे यार ।
छोड़ कपट छल को सदा , करें प्रीत व्यवहार ।

अच्छे जीवन की सदा , होती सबको आस ।
इससे ही तो देखिए, छा जाता मधुमास ।

पेड़ लगायें हम सभी , जीवन का आधार ।
बिना पेड़ के देखना, होगा हाहाकार ।

अंध तमस को चीर कर, आया नवल उजास ।
जीवन में फिर छा गया , एक नया उल्लास ।

हे!भगवन विनती यही , दो ऐसा वरदान ।
जीवन सबका धन्य हो , मिले मान सम्मान ।
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गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

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