डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय :- जीवन
विधा :- दोहा छंद
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जीवन अपना देखिए, ईश्वर की सौगात ।
सत्कर्मों के साथ ही , बीते दिन अरु रात ।
पानी का है बुलबुला, जीवन अपना यार ।
मिलजुलकर हम सब रहें , करें सभी से प्यार ।
जीवन ये अनमोल है,सुन लो मेरे यार ।
छोड़ कपट छल को सदा , करें प्रीत व्यवहार ।
अच्छे जीवन की सदा , होती सबको आस ।
इससे ही तो देखिए, छा जाता मधुमास ।
पेड़ लगायें हम सभी , जीवन का आधार ।
बिना पेड़ के देखना, होगा हाहाकार ।
अंध तमस को चीर कर, आया नवल उजास ।
जीवन में फिर छा गया , एक नया उल्लास ।
हे!भगवन विनती यही , दो ऐसा वरदान ।
जीवन सबका धन्य हो , मिले मान सम्मान ।
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गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित रचना
बेहतरीन
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