जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-जीवन
विधा-दोहा छंद
जीवन है छतरी सदा,धूप कभी बरसात |
मुश्किल से डरना नहीं,दुख को दो तुम मात ||
हर्षित रहें हर पल यहाँ,मिथ्या मोह को त्याग |
कर्मों के फल पाते सभी,अपने- अपने भाग ||
बरगद देत छाँव सदा,करते नित उपकार |
वृक्ष लगाना पुण्य सदा,यह जीवन का सार||
ऐसा भी दिन आयेगा,कर लेना तुम विश्वास |
दुख के बादल घटेंगें, मन में रखना आस||
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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