Tuesday, May 25, 2021

मानसून के शैलेन्द्र चेलक के दोहे

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
विषय - मानसून
विधा - दोहा छंद
          
                  दोहे
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1 बादल घिरकर दे रहा , धरती को संकेत।
  प्रेम अगन मिट जाएगा , झूमेंगे ये खेत।।

2 बरखा किसान मित्र हैं , चले हमेशा साथ।
  एक रूठे तो न उपजे , धान न हाथों हाथ।।

3 प्रेमी बादल धरा पर , बरसने को आये ।
 घुमड़ घुमड़ कर फिर वो, चहुंओर बरसाये।।

4 किसान सहता है सदा , मानसून की मार ।
  कभी सूखे से आँसू दे , या बारिश भरमार ।।

           - - शैलेन्द्र चेलक - -

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