पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
विषय - मानसून
विधा - दोहा छंद
दोहे
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1 बादल घिरकर दे रहा , धरती को संकेत।
प्रेम अगन मिट जाएगा , झूमेंगे ये खेत।।
2 बरखा किसान मित्र हैं , चले हमेशा साथ।
एक रूठे तो न उपजे , धान न हाथों हाथ।।
3 प्रेमी बादल धरा पर , बरसने को आये ।
घुमड़ घुमड़ कर फिर वो, चहुंओर बरसाये।।
4 किसान सहता है सदा , मानसून की मार ।
कभी सूखे से आँसू दे , या बारिश भरमार ।।
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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