जिला-रायपुर
विषय- गुलाबी एहसास
विधा-कविता
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गुलाब सी गुलाबो, की गुलाबी मुस्कान,
गुलाब है गुलाबी, या गुलाबी परिधान|
जगाता है, गुदगुदाता है, मीठा एहसास,
गुलाबी है धरती, और गुलाबी आसमान|
एहसासों को समेंटू या लफ्जों से चूम लूँ,
मेरे हाथों की लकीरों में, ये कैसा निशान|
तेरे होने की खुशी ,तेरे ना होने का गम
इनके बीच ही चलती है अब मेरी जुबान|
सहेज लेगा तुझे पूरा ही, ये तेरा 'अमित'
पत्तों में गिरी,ओश की बूंदों के समान|
अमिताभ कुमार दीवान
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