Friday, May 28, 2021

एच-एस-अरमो कृत आलेख- मोह

रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर छ.ग.।
विषय-"" मोह ""    ।
विधा--  आलेख     ।
शीर्षक-"" सांसारिक मोह """ ।
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●●•••||•सांसारिक मोह •||•••●●
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           इस भौतिक जगत में सभी जीव-जन्तुओं व वनस्पतियों को अपनी भौतिक काया मोह होता ही है ।मनुष्य तो अपनी क्रिया-कलापों को व्यक्त करने की क्षमता रखता है,अपितु बाकी जीव-जन्तुओं व वनस्पतियों के बारे में उनकी बोली व हाव-भाव से जीवनशैली व वृद्धि को सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है ।यहाँ इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मोह शब्द की व्याख्या इस प्रकार से की जा सकती है:-
               मनुष्य में मोह की पृष्ठभूमि उसके सोच-विचार के अनुसार भिन्न- भिन्न हो सकती है ।जैसे--माता-पिता का अपनी संतानों के लालन-पालन और विकास के प्रति अटूट रिश्ता अथवा मोह होता है ।दम्पत्तियों में एक-दूसरे के लिए,प्रेमियों के बीच आपस में आदि।मानव जाति का स्वभाव ही है कि बचपने से लेकर वृद्ध तक,किसी न किसी प्रिय वस्तुओं व लोगों के प्रति मोह जरूर होता है ।चाहे सजीव हो या निर्जीव क्यों न हो-?जबकि एक ऐसा मोह है जिसे सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में रखा जाता है,वह है--अध्यात्म के प्रति अति मोह का होना ,चाहे हम उसे श्रद्धा व भक्ति का रूप भी कह सकते हैं ।जिनमें सन्त-महात्मा और सच्चे भक्तों को स्थान दे सकते हैं।सांसारिक माया-मोह के अंतर्गत परिवार,समाज व देशप्रेम की भावना को भी सम्मिलित कर सकते हैं ।
               हम देखते हैं कि वनस्पतियों में भी अपने शरीर व उसके प्रत्येक अंश से उसका मोह होता है ।जब उसमें किसी प्रकार से तनाव,भय व कष्ट होता है या शरीर का कोई भी अंश विच्छेद होता है,तो वह अपने हाव-भाव से दु:ख का इजहार करता है ।मेरी दृष्टि में ये भी मोह के कारण ही होता होगा ।
           इसके अलावा जीव-जन्तुओं,जानवरों में नर-मादा अपने नवजात शिशुओं के लालन-पालन,सुरक्षा,वृद्धि के लिए हरदम,मरते दम तक प्रयासरत रहता है ।ये एक प्रकार से मोह को ही दर्शाता है ।इस बात का गहराई से अध्ययन करें तो इस भौतिक जगत में अंड़ज,बीज व जीव तत्व सभी में जीने के प्रति मोह के साथ साथ जीवन चक्र को पूरा करने की लालसा भी होती है।
          विश्व स्तर पर अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि समाज के विशेष विधा के पारखी व ज्ञानी लोगों के द्वारा किसी विशेष क्षेत्र की जानकारी व खोज को हासिल करने के लिए अपना जीवन सम्पर्पित कर देते हैं और इस त्याग व तपस्या को हम जुनून कह सकते हैं ।उन्होंने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए,अपने जीवन व परिवार का मोह के साथ-साथ सांसारिक सुखों का भी त्याग करते हुए दुनिया के सामने अनूठी व चमत्कारिक चीजों व खोजों को बखुबी अंजाम दिया है ।जिसके लिए सम्पूर्ण विश्व जगत उनके इस उपलब्धियों के लिए नतमस्तक होता है ।
         आज हम सब व दुनिया के लोग कोविड-19 महामारी से ग्रस्त व भयभीत जीवन गुजार रहे हैं ।अपितु इस संक्रमणकाल में भी कुछ लोग-जैसे-पेशेवर व्यक्ति,सेवार्थ समूह व इस प्रकार के कार्य से जुड़े सभी लोगों के साथ साथ वारियर्स के रूप में कार्य करने वाले लोगों ने मिलकर मानव जीवन को बचाने के लिए अपने जिंदगी का मोह त्यागकर,आगे बढ़कर नि:स्वार्थ भाव से परमार्थ का कार्य किया है और इस दौरान कुछ लोगों को अपनी जान की आहुति भी देनी पड़ी है ।इनके सेवा भाव को हम सब ह्रदय से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना है कि इनके परिवार को यह दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ।
           अतः हम इस शब्द की व्याख्या व गूढ़ अर्थ को समग्र रूप में प्रस्तुत करना इतना आसान नहीं है,फिर भी अन्त में,मैं यह कहना चाहूँगा कि मानव जाति के लिए कि मोह में फंसकर उसके लिए कभी प्रगति तो कभी प्रगति अवरोधक की भूमिका के रुप में उभरकर सामने आती है ।अतः अपने जीवन में सकारत्मक सोच के साथ साथ,मोह के मध्य सन्तुलन स्थापित करते हुए,नये नये आयाम भी गढ़ सकते हैं ।मेरा मत है कि सभी लोगों को भी ऐसी ही सोच रखते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के की कोशिश करना चाहिए ताकि समाज को इसका एक अच्छा प्रतिफल प्राप्त हो सके ।हमने अनुभव किया है कि परिवार व निकट रिश्तेदारों में किसी प्रियजन की आसमयिक मृत्यु होने का सदमा/शोक होता है तो उन्हें इस दुःख को सहन करने की शक्ति लाने की कोशिश करना चाहिए ताकि जिंदगी को आसान बनाने के लिए मोह-माया को भुलाकर ,इस भवसागर में अपने दायित्वों का निर्वहन कठोर मन बनाकर करने की जरूरत है ।अति- मोह का त्याग ही,जीवन में सफलता,संतुष्टी और खुशी दिला सकता है ।
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