जिला - जांजगीर चाम्पा
विषय - प्रवाह
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ज्ञान, प्रेम, भक्तिभाव के प्रवाह में बढ़ते जाऊँ,
वासना, ईच्छा, प्रलोभन से उम्र भर बचती जाऊँ।
समय की प्रवाह किस दिशा में ले जाए, कहाँ पता चलता है,
हम अपने रास्ते से न भटके, जिन्दगी तो हर पल परीक्षा लेता हैं।
बिना प्रवाह के जल से बदबू आती है,
प्रवाह की अधिकता हो तो, समाज को डूबा ले जाती है।
प्रवाह की रफ्तार कैसी हो, सूझबूझ से आगे बढ़े,
प्रवाह जिन्दगी में कैसे भी तूफान लाये, सही दिशा में रहकर उससे लड़े।
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श्वेता सिंह क्षत्रीय
जांजगीर
Nice
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteSuper Se b uper
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