ग्राम-लुकाउपाली छतवन
जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा
विषय-प्रहरी
शीर्षक-मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों
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ए मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों,
कण-कण में है भारत माँ की पहचान।
इस महकते चमन के आन बान शान,
आपके हथेलियों में है विराजमान।।1।।
अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए,
छोड़ गये हो अपने घर-परिवार को।
माताओं एवं बहनों की शुभकामना,
आपके सर पे है सदैव विराजमान।।2।।
विजय-पथ पर कदम पे कदम बढ़ाये जा,
दुश्मनों को मुंह तोड़ जावाब दिये जा।
मैदान-ए-जंग में जो हुए हैं वीर शहीद,
उन पर हम सब भारतीय हैं गर्ववान।।3।।
ए मेरे वतन के जांबाज वीर सिपाहियों,
आज फिर तुम्हें दुश्मन ललकार रहा है।
भारत माँ की स्वर्ग कश्मीर के सरहद पे,
जंग छेड़ने वाला है नापाक पाकिस्तान।।4।।
सरहद पे पहरा देने वाले वीर सिपाहियों,
दुश्मनों पर रखो कड़ी से कड़ी नज़र।
ताक रहे हैं हमलावर हमारे वतन पे,
जंग से हमारे दोस्ती का है अपमान।।5।।
सरहद पे मौत से लड़ने वाले वीर जवानों,
आपका कुर्बान वतन के लिए नाज है।
आपने जान की बाजी लगा के सरहद पे,
बर्फीली चोटियों पे आपका है अधिष्ठान।।6।।
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