संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.)
विषय-प्रहरी
दिनाँक-31.05.21
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*प्रहरी*
मैं भारत का सजग प्रहरी!
तिरंगे की आन पर मिटता।
तेरे रज में पला बढ़ा तेरी
शान पर मैं हरपल मरता।
तेरे चाहे कितने भी संकट आए
सरहद पर रहते सीना ताने।
तेरी आन बान बचाने हम
बर्फ में खड़े रहते बेगाने ।।
ऊँचे-ऊँचे पहाड़,उठती
सागर की लहरें विशाल।
कंटक भरी राहों में चलते
ताकि उन्नत रहे तेरा भाल।।
चाहे बाढ़ हो या सुनामी
या उठे सागर में तूफान ।
कोई बुरी नियत से देखे तुझे
आता है खून में उफान ।।
बम गिरे,बंदूक चले या
चले गोलियों की बौछार।
नापाक इरादों वालों से
लड़ने को रहते सदा तैयार।।
सभी भाषा,बोली,जाति,
धर्म पर लुटाते अपनी जान ।
तिरंगा की रक्षा के लिए
होते रहते सदा कुर्बान ।।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
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