जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - मानसून
विधा - दोहा छंद
शीर्षक - मानसून और किसान
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// मानसून और किसान //
मानसून की चाह में , कृषक बड़े बेचैन ।
प्यासी खेत फसल नहीं , बहते आँसू नैन ।।
मानसून की चाह में , खेत में बोय धान ।
अंकुर भी निकला नही , माथा धरे किसान ।।
मानसून की चाह में , ट्रेक्टर लिए नवीन ।
कृषक बहुत आनन्द में , उपज मूल्य समिचीन ।।
मानसून की चाह में , खेत जुताई खूब ।
खाद बीज सब हो गया , अब वर्षा की बूंद ।।
मानसून की चाह में , किसानों का जीवन ।
भाग्य और श्रम से खिला , उनकी चाह उपवन ।।
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