Monday, May 24, 2021

पदमा साहू पर्वणी के दोहे- जीवन

रचनाकार _श्रीमती पदमा साहू पर्वणी
जिला _राजनांदगांव छत्तीसगढ़ विधा _दोहा 
विषय _जीवन 
शीर्षक_जन्म मरण के बीच को, कहते जीवन काल,,,,,

जन्म-मरण के बीच को, कहतेंं जीवन काल।
ईश्वर का वरदान यह, रखो इसे संभाल ।।

जीवन कैसे हम जिएँ,  अनुपम है यह प्रश्न ।
मिले दुःख में सुख जहाँ, जीवन होता जश्न।।

 ईश्वर चेतन तत्व है, जीवन का आधार।
धारण जागृत भाव से, चलता यह संसार ।।

जीवन के हर मोड़ में , सुख_ दुख होता भान।
रहता जो समभाव में, बनता वही महान।। 

जीवन चलती है सतत , होता वृद्धि  विकास ।
पड़ जाए अवरोध तो, टूटे जीवन आस।।

करें परिष्कृत कर्म को, उत्तम रखें विचार ।
बैर भाव को छोड़कर, मनसा तजे विकार ।।

नाशवान जीवन कहो, मिलता माटी ढ़ेर।
नेक कर्म से साज लो ,जन्म-मरण का फेर।।

अर्थहीन जीवन सदा, होता नर्क समान।
जीवन का उद्देश्य ही, मनुज बढ़ाते शान।।

इंद्रधनुष के रंग में, रंगे  जीवन  रंग। 
मन में रख शुभ भावना , बढ़ें प्रीत के संग।।

अंतर्मन को झाँक लो, मिले परम सुख खान।
याद रखो यह पर्वणी, जीवन का शुचि ज्ञान।।

पद्मा साहू *पर्वणी*
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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