स्थान - मनेंद्रगढ
जिला -कोरिया
शीर्षक - "बिनती-ईश्वर से"
विधा - कविता
अपनो के दुख से दुखी है मन,
लाख कोशिश कर लूं या लाख जतन।
दिल बार बार यही पूछता है,
हे ईश्वर! कब सामान्य होगा जन जीवन।
चारो तरफ काया जर्जर है।
सफेद धुवा और राख का मंजर है।
अपने ही अपनो से दूर रहने के लिए मजबूर है।
कालचक्र का यह कैसा बवंडर है?
चिता की आग को ठंडा होते नहीं देखा।
लाशों को कतारो में इंतजार करते नहीं देखा।
इससे भयनाक नज़ारा क्या होगा ।
मौत को इतना डरावना कभी नही देखा।
माना की इंसानों से हुए ।
गुनाहों की सजा मिल रही है ।
प्रकृति से किए गए अत्याचारों,
की सजा मिल रही है।
कब तक ये खेल खेलोगे भगवन,
जिसकी हर पारी में जीत तेरी ही है।
अब तो कृपा करो हे कृपानिधान,
अपनी दया दृष्टि करो दयावान,
हम सबकी बिनती सुन लो,
हे ईश्वर!फिर से सामान्य कर दो जन जीवन,
फिर से सामान्य कर दो जन जीवन।।
ज्योतिमाला सिन्हा
No comments:
Post a Comment