ग्राम-लुकाउपाली छतवन
जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा
विधा-आलेख
विषय-नशा
********************
आज मेरी बारी है सुनने वाले सभी दोस्तों को पुनीत राम सूर्यवंशी के तरफ से प्यार भरा नमस्कार....
*नशा नाश का जड़ है, फिर भी लोग करते हैं नशा।*
*बेमौत के द्वार पहुंच जाते हैं, जो लोग करते हैं नशा।।*
प्यारे साथियों नशा एक ऐसी चीज है, इसे कोई भी व्यक्ति एक बार इसका स्वाद का मजा ले लिया हो, तो उसे ऐसा नशा लग जाता है और वे इस नशा को छोड़ना नहीं चाहता। नशा तो कई प्रकार के होता है जैसे - शराब, तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी, भांग-गांजा आदि और इसका परिणाम भी स्वास्थ्य के लिए भयानक खतरनाक बीमारी को निमंत्रण देता है।
साथियों एक और नशा होता है वो है प्यार का नशा। प्यार का नशा भी एक ऐसा नशा है, इस नशा को कोई भी व्यक्ति एक बार चख लिया हो तो उसे उसे ऐसा नशा छा जाता है और वे हर पल यही कहता.....
*प्रियतम तेरी याद में नयन हुए बेचैन।*
*तुम्हारे मधुर मिलन बिना दिल न हुए चैन।।*
फिल्म :- दिल।
स्वर :- उदित नारायण।
बोल :- मुझे नींद न आये, मुझे चैन न आये...
********************
*प्यार को प्यार मिलती है बड़ी मुश्किल से।*
*मिल भी जाती है मगर छुटती नहीं दिल से।।*
दोस्तों प्यार के बिना ये जीवन, ये संसार अधुरा सा लगता है। ये दुनिया एक-दूसरे के आशा, विश्वास और प्यार-मोहब्बत से टीका हुआ है। बिना प्यार के ये जीवन बेजान सा लगता है। दोस्तों प्यार भी कई प्रकार के होते हैं जैसे - माँ को अपने बच्चों से प्यार, भाई को अपनी बहन से प्यार, पत्नी को अपने पति से प्यार, दोस्तों को अपने दोस्तों से प्यार, धरती को भी है आकाश से प्यार।
दोस्तों कही ये प्यार अपने प्रियतम हमसफर के साथ हो जाये तो क्या कहना। वे हर पल यही कहेगा....
*मेरा महबूब, मेरा हमदम, मेरा प्यार हो तुम।*
*मेरा सरताज, मेरा हमराज, मेरा हमसफर हो तुम।।*
फिल्म :- साथी।
स्वर :- मुकेश।
बोल :- मेरा प्यार भी तू है ये बहार भी तू है....
********************
*माता-पिता के पैरो तले धूल के कण भी है पूज्यनीय।*
*माता-पिता के ममतामयी हर लब्ज है अनुकरणीय।।*
प्यारे साथियों, माता-पिता अपने जिगर के टुकड़े औलाद को प्यार, करूणा, स्नेह, प्रेम, ममता कितने करते हैं, सिर्फ वे ही माता-पिता बता सकते हैं जो अपने संतान को प्यार करते हो और बच्चे समझ सकते हैं कि उसे अपने माता-पिता इतना प्यार करते हैं। माता-पिता अपने संतान को जान से भी ज्यादा प्यार-दुलार करते देते हैं। अपने संतान के लिए एक से एक सपना संजोए रहते हैं। उसे कभी सुरज, तो कभी चंदा, तो कभी राज दुलारा कहकर पुकारते हैं और कभी.....
*मेरी दुनिया के अरमान हो तुम, मेरे नयनों के तारा हो तुम।*
*मेरी जिन्दगी के रोशन हो तुम, मेरा राज दुलार हो तुम।।*
फिल्म :- एक फूल दो माली।
स्वर :- मन्ना डे।
बोल :- तूझे सुरज कहूँ या चंदा, मेरा नाम रोशन करेगा जग मे....
********************
*प्यार से बढ़कर प्यारी कोई चीज़ नहीं इस जहां में।*
*सभी को दो प्यार-मोहब्बत का पैगाम इस जहां में।।*
प्यारे दोस्तों, मित्रता निभाना भी मानवीय जीवन के एक महत्वपूर्ण भाग है। मित्रों के यहाँ आने-जाने से, शादी-ब्याह में या अन्य सामाजिक समारोह में जाने से लोगों से हमारे परिचय बढ़ता है। परिचय से नाता-रिश्ता बनता है। नाता-रिश्ता से प्यार बढ़ता है। प्यार से दोस्ती मित्रता होता है। लोगों से परिचय होने से भविष्य में इनसे किसी भी प्रकार के दुख-दर्द में सहयोग की आशा की जा सकती है। परस्पर सहयोग से दोस्ती बढ़ती जाएगी और दोस्ती का बंधन मजबूत होता जायेगा। क्यों दोस्तों आप भी दोस्ती करना चाहोगे न और यही कहेंगे.....
*दुनिया के सारे गमो को तोड़ेंगे मगर दोस्ती का ये साथ न छोड़ेंगे हम।*
*बैरी दुश्मनी के नाता को भूलेंगे मगर दोस्ती का ये पैगाम न भूलेंगे हम।।*
फिल्म :- शोले।
स्वर :- किशोर कुमार।
बोल :- ये दोस्ती हम न तोड़ेगे, तोड़ेगे मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे।
********************
दोस्तों, दिल तो चाहता है कि आप लोगों से जी भर के बातें करु पर हम सब वक्त के जंजीर से बंधे हुए हैं। उसके साथ-साथ चल रहे हैं अब मेरा भी जाने का वक्त आ गया है पर दोस्तों जाने से पहले मेरे ये शुभकामनाएं आप लोगों के लिए...
*दोस्तों मेरी दुआएँ आपके जिंदगी के सफर में हो।*
*दुनिया के हर खुशियां आपके दामन में हो।।*
*आपके हर शाम युववाणी के साथ गुन-गुनाती शाम हो।*
*फूलों सी खिल-खिलाती आपके हर सुबह शुभ हो।।*
इसी शुभकामनाके साथ अब पुनीत भाई को आज्ञा दीजिए नमस्कार.....
********************
No comments:
Post a Comment