Monday, May 31, 2021

लीलाधर कुम्हार की रचना- प्रहरी

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - प्रहरी
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - जीवन का प्रहरी
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     // जीवन का प्रहरी //

रोकने वाले , टोकने वाले ,
सूक्ष्म दृष्टि से चौकस होकर ,
सतत सुरक्षा करने वाले ,
मैं जीवन का प्रहरी हूँ ।

मेरा जीवन अपना जीवन ,
भटक न जाए , बहक न जाए ,
जगत - जाल के विषयारण्य में ,
काया - माया के सान्निध्य में ,
चौकीदार बना बैठा हूँ ,
जीवन का पथ प्रशस्त करने ,
मैं जीवन का प्रहरी हूँ ।

धर्म और अध्यात्म की वर्दी ,
ज्ञान भक्ति सत्संग की टोपी ,
संयम सदाचार की लाठी ,
इन्द्रिय मन बुद्धि पर अंकुश ,
कर में घोड़े की लगाम ज्यों ,
जीवन रथ को हाँकनेवाला ,
मैं जीवन का प्रहरी हूँ ।

प्रभु की धरोहर मानव जीवन ,
यह दुर्लभ कोहिनूर रतन धन ,
आखिर में प्रभु को ही अर्पण ,
बिगड़ न जाए , बिखर न जाए ,
सावधानी की साधना से ,
जीवन का उद्देश्य थामने ,
मैं जीवन का प्रहरी हूँ ।

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