जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-प्रवाह
विधा-कविता (मुक्त छंद)
जीवन नदी की बहती
धारा की तरह सतत्
प्रवाह में तीव्रता।
बाल्यवास्था भय रहित
बरसात की जल धारा
की तरह अविरल।
युवावस्था अानंद,मस्ती
में बाधाओं से चिंता
मुक्त चिरंतन।
पौढ़ावस्था नदी के डेल्टा
की तरह चिंतन युक्त
मंथर-मंथर।
बुढ़ापा सागर में समाहित
नदी की तरह ईश्वर में
विलीन हो जाता ।
प्रवाह नदी का जीवन की
तरह अक्षुण्ण रहता
जन्म -मृत्यु से परे।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
No comments:
Post a Comment