Friday, May 21, 2021

विनोद कुमार "जोगी" की रचना- माँ

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- माँ
विधा :- दोहा गीत
शीर्षक :- मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार

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तेरी आँचल में सदा, बरसे नेह अपार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

नौ महिने तक कोख में, जीवन भर निज गोद।
लालन-पालन नित करे, रहे सदा अनुमोद।।
मूरत है वात्सल्य की, जीवन का आधार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

सेवा सबकी जो करे, जिनसे नव्य प्रभात।
मातु रूप में है मिली, ईश्वर की सौगात।।
काजल की बिंदी लगा, लेती नजर उतार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

पाक कला से आपके, करते छप्पन भोग।
मैया तेरी प्रार्थना, रखती हमें निरोग।।
तेरे ही आशीष से, हो ऊर्जा संचार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

गुरुवर शिक्षा दायिनी, मैया तू हमराज।
लूला - लँगड़ा जो रहें, है तेरे सरताज।।
जिनकी गोदी में सुनो, देखा है संसार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

ईश्वर से है कामना, शुभ्र करूँ मैं काम।
शीश उठा तू चल सके, रौशन हो माँ नाम।।
बन लाठी मैं आपकी, दूँ मैं भी उपहार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

विनती जोगी नित करे, मिले मातु का प्यार।
मैया जीवन दायिनी, वंदन बारम्बार।।

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