जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय-खगंगा
विधा-छंदमुक्त कविता
शीर्षक-खगंगा
----कैसे ब्यक्त करुँ मैं इसको,
मन में विचारों का खगंगा है ।
कोई दुख के शूल उठाता,
कोई बहाता अश्रुगंगा है ।
रूकना नहीं है हमको ,
थमना नहीं है हमको ,
चाहे संमुख दुख का सागर हो ,
रख कर हौसला पार करें तो ,
सुखमय जीवन गंगा है।
हर दामन में.फूल नहीं,
कांटों से भी रिश्ता निभाना है ।
इसमें पारंगत होकर हमको ,
दुनियाँ को दिखाना है।
मौत से क्या डरना हमको,
ये अंतिम सत्य फसाना है,
चीर निद्रा में समाहित होकर ,
जीवन पथ बनाना है।
चाहे आँखों से अश्रु के गुंज गिरे ,
इन गुंजों के मोती से
जीवन हमें सजाना है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह "
कोरबा, छ.ग.
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