Tuesday, April 6, 2021

मोनालिसा बेहरा की रचना- शहीद

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुन्दरगढ़, ओडिशा
विधा-काव्य
विषय-बीजापुर
शीर्षक-शहीद की विधवा का दर्द...

आज जो बीजापुर की धरती लाल हुई है
वहां बिखरा मेरा सुहाग है
तुम्हारे ईमान और बलिदान की गाथा जो गा रहे हैं
शहादत पे तुम्हारे श्रद्धा के सुमन चढ़ा रहे हैं
क्या वो कल तुमको याद रखेंगे?
आज भीड़ है मेरे आंगन में
मेरी व्यथा पे सब आंसू बहा रहे हैं
मेरे चीखों के सैलाब को
तुम्हारे मासूम अनाथ बच्चों को
दुनिया को दिखा रहे हैं
आज तुम्हें देश का बेटा जो बता रहे हैं
क्या वो कल तुमको याद रखेंगे?
आज तुम्हारे अंतिम यात्रा में जो साथ चल रहे हैं
तुम्हे सलामी देकर जो खुद को धन्य समझ रहे हैं
कल बरसा के बादल सा हट जाएंगे
भूल शहादत को तुम्हारी अपने मे ही रम जाएंगे
अपने बड़े बड़े वादों से ये मुकर जाएंगे
नहीं तुमको कभी याद करेंगे
कल जब माँ-बाबूजी को दवा नही मिलेगी
दो वक्त की रोटी को भी लाले पड़ जाएंगे
तुम्हारे परिवार का हाल जानने
क्या कल कोई हमारे घर आएंगे?
ना कुछ बदला है, ना कुछ बदलेगा
किसी और कि शहादत पर 
फिर वही दोहराया जाएगा
मेरी अन्तर्वेदनाओं की व्यथा
क्या कभी कोई समझ पायेगा?
आज रंगी है जो बीजापुर की धरती
वहां बिखरा मेरा सुहाग है।।

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