जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- कराहता बीजापुर
विधा-कविता
बीजा के सघन पेड़ों से
अच्छादित सघन कानन।
वनभैसा,मोर,करन तोता
कुलांचे भरते हिरण -वृन्द।
पामेड व भैरमगढ़ है जहाँ
जीता- जागता अभयारण्य ।
इन्द्रावती है राष्ट्रीय उद्यान,
टाइगर प्रोजेक्ट में हैं बाघ
कल-कल नदियाँ व झरने,
गाथा गाते मिला कर सुर,
बीजा वनों का द्वीप कहते,
हरीतिमा युक्त है बीजापुर ।
आहत है अपनी ही रक्षा में
तैनात वीर सपूतों की उस
शहादत पर खूनों की होली
खेली है नक्सलियों ने जहाँ
कराह रहा समूचा बीजापुर,
बस्तर की दर्द बना नासूर।
नमन सपूतों यह बलिदान,
अब यूं व्यर्थ नही जायेगा
बस्तर की इस शौर्य गाथा में,
शहादत का दर्द लिखायेगा,
कराहता बीजापुर तुम्हें ही
अमर जवानों कह पुकारेगा।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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