संबलपुर,जिला-कांकेर, ( छ. ग.)
विषय-कादम्बरी,
दिनाँक-09.04.21
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*कादम्बरी*
कोयल कुहूकिनी,पीक,
बसंतदूत बैठी हैआम्र मंजरी।
लेकर आती मधुमास का संदेशा
ऐसी हो तुम कादंबरी।।
तन काला पर कोकिल कंठी
नाम तुम्हारा है मधु रागिनी ।
तेरी मीठी कुहू कुहू की बोली
लगती है प्राण दायिनी।
मदमाती सुगंध लिए
आता है मास बसंत।
पत्ते सारे झड़ गए,नव पल्लव ने
बतलाया आया पतझड़ का अंत।।
अमवा की डाली पर बैठी
कोयलिया गाती गीत हो मन मतंग।
मधुप का गुनगुन,तितलियों
का डूबा है मन तरंग ।।
गूँज उठा दिग-दिगंत भोर में
आई कोयलिया की आवाज ।
नव पल्लव,नव कोपलें
तरु का करती है साज ।।
अलौकिक आनंद लिए
ऋतु बसंत है आई ।
कादंबरी छेड़ रही तान
प्रकृति भी है मुस्कुराई।।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
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