जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- गवेजा
विधा-छंदमुक्त कविता
शीर्षक- गवेजा
--बातचीत से हो जाती है,
हर मुश्किल आसान यहाँ ।
मैत्री भाव से मिलते हैं तो ,
अजनबी भी हो जाएं मित्र यहाँ।
शान्तिमय हो वार्तालाप तो ,
युद्ध की है जगह कहाँ ।
दो बुजुर्गों के करने से गवेजा ,
बज उठती है शहनाई बाजा ।
सखी सहेली के मिलने से ,
खुल जाती है सुख दुख की गठरी
चल उठती है वार्तालाप फिर ,
बीत जाती है भरी दोपहरी ।
।। इति ।।
" गोमती सिंह"
कोरबा ,छ.ग.
बहुत सुंदर रचना
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