Friday, April 16, 2021

शैलेन्द्र चेलक की रचना- जहाज़

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
विषय - जहाज
शीर्षक - सतगुरु जहाज

           सतगुरु जहाज
----------------------------------------
संसार सागर का ,
सतगुरु जहाज होते ,
जो राह चले मनमाने ,
खाते रहते गोते ,

सतगुरु सहारा ही ,
नदी का किनारा है ,
जो साथ नही उनका ,
जीवन बहती धारा है ,

पार जाने को बस ,
बैठ जाना पड़ता है ,
उतरता है उस पार ,
जो जहाज पर चढ़ता है ,

मौजों को सीने पर ,
जो झेला करता है ,
शागिर्दों की राह में ,
खुशियों का मेला करता है ,

श्रद्धा और विश्वास से ,
बस सुमिरन कर चल मन ,
पार करायेंगें इक वो ,
सफल हो जाएगा जीवन ,

अवतार लिए जिसने ,
भव पार कराने को ,
वो देखता है सबकुछ ,
तेरे हर एक बहाने को ,

बहाना अब न चलेगा बंदे ,
काल की मार जारी है ,
संगत करले सतगुरु की ,
हरि नाव की सवारी है ,

बक्श देंगें वो तेरे ,
हर गुनाहों को भी आज ,
खेवैया भी सद्गुरु ,
सतगुरु ही नाम जहाज ,

         - - शैलेन्द्र चेलक - -

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...