पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
विषय - जहाज
शीर्षक - सतगुरु जहाज
सतगुरु जहाज
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संसार सागर का ,
सतगुरु जहाज होते ,
जो राह चले मनमाने ,
खाते रहते गोते ,
सतगुरु सहारा ही ,
नदी का किनारा है ,
जो साथ नही उनका ,
जीवन बहती धारा है ,
पार जाने को बस ,
बैठ जाना पड़ता है ,
उतरता है उस पार ,
जो जहाज पर चढ़ता है ,
मौजों को सीने पर ,
जो झेला करता है ,
शागिर्दों की राह में ,
खुशियों का मेला करता है ,
श्रद्धा और विश्वास से ,
बस सुमिरन कर चल मन ,
पार करायेंगें इक वो ,
सफल हो जाएगा जीवन ,
अवतार लिए जिसने ,
भव पार कराने को ,
वो देखता है सबकुछ ,
तेरे हर एक बहाने को ,
बहाना अब न चलेगा बंदे ,
काल की मार जारी है ,
संगत करले सतगुरु की ,
हरि नाव की सवारी है ,
बक्श देंगें वो तेरे ,
हर गुनाहों को भी आज ,
खेवैया भी सद्गुरु ,
सतगुरु ही नाम जहाज ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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