निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय-चार-चिरौंजी ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-"" चार-चिरौंजी """ ।
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%%%==!!चार-चिरौंजी!!==%%%
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मैं बीहड़ जंगलों की मिठास हूँ,
फाल्गुन-चैत्र मास की फसल हूँ ।
व्यापारियों को मालामाल करे---
जनजातियों की मेहनत से ही,
बामुश्किल अब ये फसलें मिलती ।
मानव सभ्यता के विकास ने--
प्राकृतिक संसाधनों व सौंदर्य का,
भरपूर दोहन करता रहा है,
आज फलदार वृक्षों का सफाया हुआ।
मेरी मिठास में,लाल चींटियों का डेरा--
हरे से गुलाबी व फिर कालिमा आती,
पक्षियों को,ये फल बहुत है भाता,
कठोर कवच के भीतर,मैं रहता ।
यही दाना या बीज ही--
चार-चिरौंजी है,कहलाता ।
खीर,मेवे-मिष्ठान्न की शान बढ़ाता,
दुर्लभ फसल होते जा रहा हूँ ,
इसलिए मोल से,बिक पाता हूँ ।
चेहरे के,सौंदर्यीकरण का लेप --
महिलाओं की सुन्दरता निखारता ,
शीतलता व पौष्टिकता का गुणकारी,
मेरी लकड़ी व पत्तियाँ हैं उपयोगी ।
चार-चिरौंजी सी मिठास --
दूसरों में,मिलकर स्वाद बढ़ाना,
ऐसे ही गुणों को,हमें अपने जीवन में,
अपनाकर,मित्रता का भाव है जगाना ।
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**08/04/2021,गुरुवार ****
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