जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - बीजापुर
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बीजापुर की धरती चीख-चीख कर, करती है ये पुकार.
मत लो निर्दोषों के प्राण, बंद करो ये अत्याचार।
चारों तरफ लाल है, रक्त की बूंद से.
काँप रही है यहाँ की धरती, तोप बंदूकों की गूंज से।
न जाने सरकार को यह दृश्य, कब नजर आएगी.
वो भी किसी बेटे, पति, पिता है, ये बात समझ में आएगी।
हम एक है, हम एक हैं, कहने से कोई एक नहीं हो जाता.
अगर कोई नहीं करता उनकी मदद तो, उन तक हथियार कैसे पहुँच जाता।
वहाँ की सुन्दर हरियाली, सुन्दर मनोरम दृश्य.
जहाँ जाने से डर रहा है, आज हर एक मनुष्य।
इतनी सेना, इतने हथियार, इतना ताकतवर है हमारा देश.
फिर क्यों नक्सलियों को नहीं भगा पाए, इसके पीछे क्या हैं संदेश।
एक दिन में हमारी सेना, उन नक्सलियों को खदेड़ जाएगी.
तब सुन्दर और शान्त बीजापुर, फिर से हमें नज़र आएगी।
लेकिन इसके लिए हमारी सरकार को, आगे आकर करने होंगे प्रयास.
एक पार्टी को दूसरे पार्टी पर दोषारोपण करने से, नहीं बदलेगा इतिहास।
मैं उन वीर जवानों को करती हूँ नमन.
जो अपनी प्राण गवाकर बचाते है हमारी वतन।
इति
"श्वेता सिंह क्षत्रीय"
जांजगीर
सत्य को चरितार्थ करती कविता बहूत सुंदर।
ReplyDeleteBahot sunder rachna
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