निवास-बायरन बाज़ार,रायपुर ।ल
जिला- रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विषय-चेतिका ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-"" चेतिका "" ।
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●●●••||चेतिका ||••●●●
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चार दिन की,जिन्दगानी--
फिर हो जाती है,जीवन की शाम ।
जब तक,सांसे हैं---
माया-मोह के मकड़जाल में,
फँसा रहता,मैं की दुनिया में जीता ।
जीवन का फलसफा यही है--
सँसार में आया है तो,
एक न एक दिन,उसे जाना है ।
चेतिका तक,अपनों के हाथों--
पहुँचने का नसीब,
सबको नहीं है मिलता ।
भवसागर में,प्रभु से आस्था रख--
तेरा जीवन सफल हो जाएगा,
अच्छे कर्म कर,चेतिका में,
समाने के बाद भी,तेरा नाम रहे ।
आज कोरोना वायरस की महामारी ने,
कितने परिवार को,दुखित किया है,
इसके चपेट में आये,व्यक्तियों की,
लाशों को भी,चेतिका नसीब नहीं होती
कैसा,अजीब मंजर है,लाशों को,है--
छूना मना और ठीक से,सदगति होती।
जीवन के सत्य को,हम जान लें--
सबको,सदगति नहीं है मिलती,
नसीब वालों को ही मिलती ,
मानवता का रिश्ता निभाते रहो ,
यही बातें,तेरे काम आयेगी ।
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**14/04/2021,बुधवार *****
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