जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
विषय - बीजापुर
शीर्षक - बस्तर पूछती है सवाल ?
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बस्तर की धरती आखिर, होती रहेगी लाल कब तक,
नासूर बन चुकी हैं समस्या, रहेगी यही हाल कब तक।
वोट बैंक की राजनीति छोड़, अब तो समाधान करो,
बलिदानियों के पार्थिव पर, सियासी बवाल कब तक।
खोखली माओवाद संग मानवाधिकार की चाल चल,
मासूम वनवासियों को, बनाते रहेंगे वे, ढाल कब तक।
वो बुद्धि जीवियों अब नफरत की आग लगाना छोड़ दो,
सैनिकों के घर परिवार, होते रहेंगे यूँ बेहाल कब तक।
केवल संवेदना व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा अब,
आखिर खोते रहेंगे, मजदूर किसान के, लाल कब तक।
सत्ता बदली नीति बदली, बस्तर की हाल वही के वही है,
दो पाटों के बीच में बस्तर,बनती रहेगी कंकाल कब तक।
निर्वस्त्र कर लाशों को, नाच रहे हैं वे, देखो कैसे नंगा नाच,
मानवता को झकझोरने वाली,आती रहेगी भूचाल कब तक।
कभी दंतेवाड़ा, कभी सुकमा, कभी कांकेर बीजापुर,
लाल अँधेरा का आतंक होता रहेगा विकराल कब तक।
कितने बार रक्त से रंगेगी बस्तर , कितने बार करेंगे निंदा,
कब निकलेगा हल इसका, बनी रहेगी सवाल कब तक।
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