Wednesday, April 7, 2021

श्वेता सिंह क्षत्रीय की रचना- संगम

रचियता - श्रीमती श्वेता सिंह क्षत्रीय
जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग) 
विषय - संगम
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जीवन तो सुख-दुख का संगम है,
     यहाँ कोई किसी का नहीं, बस इसी बात का गम है।

जिन्दगी बीत रही सुख की तलाश में,
     कितने अपने पीछे छूटे, कल को सवारने की आश में।

आज अपने अपनों से जुदा हो गए,
      नहीं दिखता आपस में प्रेम, जाने कहाँ खो गए।

नहीं बना पाते दो परिवार मिलके प्रेम का संगम,
      यहाँ कोई किसी का नहीं, बस इसी बात का है गम।

नदियाँ आपस में मिलती हैं, तब संगम बन जाती हैं,
    कोई किसका जल है, यह बात कहाँ पता चल पाती हैं।

सात सुर मिलकर एक गीत बनते है,
       तब कही जाकर सुख दुख में जीवन कटते हैं।

सुख में भी साथ हो, दुख में भी ऐसी दुनिया बन जाए,
       अपनी स्वार्थ को भुलकर सब एक दूसरे के काम आए।

जीवन सुख -दुख का संगम हैं,
     यहाँ कोई किसी का नहीं, बस इसी बात का गम हैं।।

     !! इति!!
श्वेता सिंह क्षत्रीय
     जांजगीर

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