जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-संगम
विधा-कविता (मुक्त छंद)
कई नदियों का संगम हो तो,
तीर्थ स्थल बन जाता है ।
सप्त -स्वर का संगम हो तो,
गीत,गजल बन जाता है ।
ज्ञान -बुद्धि का संगम हो तो,
बुद्धिजीवी बन जाता है ।
मन - चित्त का संगम हो तो,
धर्मात्मा बन जाता है ।
सप्त तारों का संगम हो तो,
वाद्ययंत्र बन जाता है ।
कर्म- परहित का संगम हो तो,
महामानव बन जाता है ।
बड़ी जल राशि का संगम हो तो,
महासागर बन जाता है ।
मीराआर्ची चौहान,
कांकेर,छग
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