Wednesday, April 7, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- संगम

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-संगम
विधा-कविता (मुक्त छंद)

कई नदियों का संगम हो तो,
 तीर्थ स्थल बन जाता है ।

सप्त -स्वर का संगम हो तो,
गीत,गजल बन जाता है ।

ज्ञान -बुद्धि का संगम हो तो,
  बुद्धिजीवी बन जाता है ।

मन - चित्त का संगम हो तो,
  धर्मात्मा बन जाता है ।

सप्त तारों का संगम हो तो,
 वाद्ययंत्र बन जाता है ।

कर्म- परहित का संगम हो तो,
 महामानव बन जाता है ।

 बड़ी जल राशि का संगम हो तो,
  महासागर बन जाता है ।

मीराआर्ची चौहान,
कांकेर,छग

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