सुन्दरगढ़,ओडिशा
विधा -काव्य
विषय-संगम
राधा-कृष्ण के संगम से
पवित्र तीरथ धाम बने हैं
आओ कभी जो वृंदावन में
आज भी दर्शन हो जाएंगे
काल की सीमाओं को लांघ
गोपालों के संग फिरोगे
गलियों में,कुंजो में
सघन वृक्षों के छाया मिलेंगे
सुखद,सुगन्धित पवनों में
खुद को खोकर श्याम मिलेंगे
यमुना के तट पर अब भी
मुरली के मधुर तान मिलेंगे
कदम के डाल पर बैठे
मुस्कान लिए घनश्याम मिलेंगे
गर मीरा सा कर पाओ प्रेम
तो हृदय में ही श्याम मिलेंगे
आत्मा परमात्मा के संगम से
सुखद भविष्य के वरदान मिलेंगे
तपोभूमि ब्रज में ही तुम्हें
सारे पवित्र तीरथ धाम मिलेंगे।।
Sunder����
ReplyDeleteAati sundar mam
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