Wednesday, April 7, 2021

विनोद कुमार "जोगी" की रचना- संगम

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- संगम
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे "संगम"

#######################

गंगा यमुना अरु सखा, सरस्वती की धार।
संगम प्रयागराज में, बाँट रहे हैं प्यार।।1।।

यमुना चंबल सिंध अरु, क्वारी पहुज प्रवाह।
पचनद संगम देखने, उठती उर में चाह।।2।।

महानदी सोंढ़ूर अरु, पैरी गाती फाग।
संगम अनुपम देख लो, छत्तीसगढ़ प्रयाग।।3।।

कहे त्रिवेणी लोग नित, महानदी अरु लांत।
संगम देखो मांड की, बड़ी अनूठी गात।।4।।

यौवन के उन्माद का, चढ़ा सभी पर रंग।
नर नारी संगम हुआ, उर में उठे उमंग।।5।।

देख ग्रहों का हो रहा, संगम बड़ा अनूप।
आस जगी उर में नवल, जीवन बदले रूप।।6।।

कविवर भावों का करे, शब्दों से श्रृंगार।
सुन्दर संगम से करे, संदेशा संचार।।7।।

होती धरती का सुनो, मनवा से जब मेल।
सबको मन भावन लगे, संगम यह बेमेल।।8।।

दृग को भाती दृश्य इक, भरती उर उल्लास।
देख क्षितिज में मिल रहे, धरती अरु आकाश।।9।।

संगम ऋतुओं का हुआ, आया सखा बसंत।
धरती के श्रृंगार से, खुशियाँ मिले अनंत।।10।।

#######################

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...