Monday, April 12, 2021

श्वेता सिंह क्षत्रीय की रचना- गवेजा

रचियता - श्रीमती श्वेता सिंह क्षत्रीय
जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग) 
विषय - गवेजा

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करके वार्तालाप न जाने कितने युद्ध जीत जायेंगे,
बिना अश्त्र-शस्त्र के ही हर बात सुलझ जायेंगे।

एक मिठास की प्यारी बोल, सारे जख्म भर देते हैं,
अगर बोल में ही हो कड़वाहट तो, रिश्तों में जहर घोल देते हैं।

कोयल की मीठी बोल सबके दिल को भाती है,
कौआ को तो देख, दूर से ही भगा दी जाती हैं।

भारत में हैं न जाने कितनी भाषाएँ,
हर भाषा को लोगों ने है, बड़े प्रेम से अपनाएँ।

यहाँ की हर भाषा हमारे अन्तर्मन को भाती हैं,
अलग-अलग राज्यों की ये तो पहचान बताती हैं।

एक शिशु से एक वृद्ध तक, सबसे प्रेम की भाषा बोलिए,
अगर हमारी वाणी में ही मिठास न हो, तो हम इंसान कैसा सोचिए।

वाणी की कर्कसता से अक्सर दिल टूट जाया करता है,
प्यार के दो मीठे बोल से टूटा मनोबल भी जुड़ जाया करता है।

मन की व्यथा परिवार में बांटने से कम हो जाया करते है,
अक्सर हमारे बुजुर्ग उलझती गुत्थी को भी सुलझाया करते हैं।

आओ मिलकर गवेजा करके दुख हम बांटे,
जिन्दगी को खुशियों से भर दो न हो बैर के कांटे।

     !! इति!!
"श्वेता सिंह क्षत्रीय"
     जांजगीर

19 comments:

  1. Bahut sundar rachna

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  2. बेहतरीन कविता

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  3. बहुत सुंदर रचना

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  4. बहुत सुंदर रचना

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  5. बहुत सुंदर रचना

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  6. अति सुंदर,बहुत सुंदर

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  7. जबरदस्त

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  8. बहुत बढ़िया रचना

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  9. अति उत्तम रचना

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  10. Bahot sundar kavita hai..��

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