Monday, April 12, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- गवेजा

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.) 
       विषय-गवेजा
            दिनाँक-12.04.21
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                 *गवेजा*

रिश्तों को जिंदादिल बनाएं 
रखने के लिए गवेजा जरूरी है ।
सन्नाटे में होती नहीं गुजर
संवाद हीनता खत्म करना जरूरी है।। 

अभिव्यक्ति जीने के लिए 
बहुत  ही जरूरी है। 
मौन अधरों से संवादों का
पर्दा हटाना भी जरूरी है।।

दर्द है गर सीने में, 
अश्क भी  बहते हैं ।
जख्मों पर अश्रु धार 
बहाना भी जरूरी है ।।

जिंदगी खुशहाल रहे 
सीने से बोझ उतर जाएं।
संवाद हीनता के दौर में 
तकरार करना भी जरूरी है।।

कोई किसी से अगर 
ना बोले, ना देखें।
वाणी की यह सबसे 
बड़ी मजबूरी है ।।

जीवन डोर टूटने लगे, 
पीड़ा को वाणी ना मिले।
तब मन का अवगुंठन खोल 
शब्दों की स्वर देना भी जरूरी है ।।

संवादों पर विराम लगा 
कर भी कोई जीता है ।
विवादों के समाधान के लिए 
संवाद *गवेजा* जरूरी है ।।

संवाद समर्पण मिठास 
भरा होता रहे ।
ब्रह्मांड की निरन्तरता के 
लिए संवाद जरूरी है।।

भावों की पूर्णता बिन 
भाषा के पूरी नहीं होती।
मौन को मुखर करने के लिए 
संवादों का होना जरूरी है।

      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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