जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - व्रीहि
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - व्रीहि
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//व्रीहि//
व्रीहि कण अनमोल है ,
जीवन शक्ति प्रदायक ।
तन मन बुद्धि का पोषण ,
होते निरन्तर सम्यक ।।
चावल अनाज या अन्न को ,
संस्कृत में कहते व्रीहि ।
मानव का है मुख्य आहार ,
श्रम से कृषक उपजाहिं ।।
छत्तीसगढ़ प्रसिद्ध है ,
व्रीहि फसल के कारण ।
विविध किस्म के धान यहाँ ,
सोने जैसे सुहावन ।।
व्रीहि खेतों की शान है ,
धरती का वरदान ।
पूजा स्वागत दान में ,
महिमा अति महान ।।
रोटी बासी भात अनेक ,
बनते स्वादिष्ट व्यंजन ।
ग्रामीण मजदूर किसानों का ,
व्रीहि लोकप्रिय भोजन ।।
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