Saturday, March 13, 2021

गिरधारी लाल चौहान कृत आलेख- दार्शनिक एवं उसका दृष्टिकोण

नाम गिरधारी लाल चौहान
स्थान नवापारा खुर्द सक्ति
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा---आलेख
विषय--दार्शनिक एवं उसका दृष्टिकोण

शीर्षक- अपना दर्शन श्रेष्ठ दर्शन
दर्शन का शाब्दिक अर्थ होता है  देखना दार्शनिक वह होता है जो दर्शन शास्त्र का ज्ञाता होता है पूरे विश्व में अनेकों दार्शनिक है  कार्ल मार्क्स ,लेनिन, रुसो, महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध ,महावीर स्वामी दयानंद सरस्वती ,आत्मानंद सुकरात प्लूटो अरस्तू सबकी अपनी विचार धाराएं एवं सिद्धांत है सभी ने नियमों का प्रतिपादन किया है एवं मानव 
हित पर जोर दिया गया है समय देश काल परिस्थितियों के अनुसार दर्शन का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है किसी विचार धारा को सुनकर हम उसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं मानने और जानने की जिज्ञासा मन में उत्पन्न हो जाती है ।उसके पीछे हम तर्क वितर्क भी करने लग जाते हैं । कुछ ऐसे सिद्धांत और नियम भी है जिसका हमारा मन घोर विरोध करता है । उसे मानने की बात तो अलग उसे मिटाने की सोचने लगता है हम हाथ उठाकर कहने लग जाते हैं ।ये समाज विरोधी है दकियानूसी विचार धारा है इससे क्या प्रेरणा मिलेगा इन बातों को सुनकर जानकर कहकर किसका भला हो सकता है इसे हटाया जाना चाहिए कोई तो प्रतिज्ञा भी कर लेता है कि जब तक यह विचार धारा या धारणा जब तक मिटा न लूंगा भोजन तक ग्रहण नहीं करुंगा ।
ये दार्शनिक विचार धाराएं किसी एक क्षेत्र विशेष की न होकर सकल विश्व के लिए होती है । कोई सामाजिक आर्थिक, धार्मिक ,धारणाओं पर बल देते हैं कोई राजनीतिक राष्ट्रीय, मातृभूमि, मातृभाषा।सबका दृष्टिकोण कोण शांति मानव कल्याण सुखों की प्राप्ति दुखों का अंत ही होता है मार्ग सबके अलग-अलग होते हैं किसी मार्ग में त्वरित कल्याण है किसी में कुछ प्रतिक्षा करने की आवश्यकता होती है ।

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